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यूनाह 4

़ुरहम पर

1 िइस बह़ुऔर 2 और उस ़ुवनूँ ि ़ुवन, जब ैं अपनवतन ें और तरसगना, यहकहा? ैं नति रहकऱुहर करनें और शफें और अज़ा़िकरनरहतै। 3 अब ़ुवनिनत करतूँ ि े, ूँि इस मर हतर ै। 4 तब ़ुवनरमा, ऐसै? 5 और शहर हर मशरितरफा; और वहाँ अपनिएक छपपर बनकर उसकें रहा, ि ें शहर ै। 6 तब ़ुवऩुकदउग, और उसऊपर ि उसकसर पर और वह तकलबचऔर उस वजह ियत ़ु7 िसरिबह वक़़्ुएक ़ा ा, िउस और वह गई8 और जब आफबलन, ़ुरब चलऔर आफि गरसर ें असर िऔर वह गयऔर आरज़ूमनकर कहनलगि इस मर हतर ै। 9 और ़ुरमा, "इस वजह ऐसै?" उस कहा, "यहाँ तक ूँ ि मरनहतूँ।" 10 तब ़ुवनरमि इस इतनै, िसकिहनत और उसउगा। एक ें उगऔर एक ें गई11 और ि ैं इतनबड़े शहर िनवकरूँ, िें एक हज़ा़्ऐसैं अपनदहनऔर ें नहीं कर सकते, और मवै।

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