13 वह ऊन और कतान ढूंडती है,
और ख़ुशी के साथ अपने हाथों से काम करती है।
14 वह सौदागरों के जहाज़ों की तरह है,
वह अपनी ख़ुराक दूर से ले आती है।
15 वह रात ही को उठ बैठती है,
और अपने घराने को खिलाती है, और अपनी लौंडियों को काम देती है।
16 वह किसी खेत की बारे में सोचती हैऔर उसे ख़रीद लेती है;
और अपने हाथों के नफ़े' से ताकिस्तान लगाती है।
18 वह अपनी सौदागरी को सूदमंद पाती है।
रात को उसका चिराग़ नहीं बुझता।
24 वह महीन कतानी कपड़े बनाकर बेचती है;
और पटके सौदागरों के हवाले करती है।