रोज़ाना की ज़िन्दगी से सीख लेना
1 ऐ मेरे बेटे, अगर तू अपने पड़ोसी का ज़ामिन हुआ है,
अगर तू हाथ पर हाथ मारकर किसी बेगाने का ज़िम्मेदार हुआ है,
2 तो तू अपने ही मुँह की बातों में फंसा,
तू अपने ही मुँह की बातों से पकड़ा गया।
3 इसलिए ऐ मेरे बेटे, क्यूँकि तू अपने पड़ोसी के हाथ में फँस गया है,
अब यह कर और अपने आपको बचा ले, जा, ख़ाकसार बनकर अपने पड़ोसी से इसरार कर।
4 तू न अपनी आँखों में नींद आने दे,
और न अपनी पलकों में झपकी।
5 अपने आपको हरनी की तरह और सय्याद के हाथ से,
और चिड़िया की तरह चिड़ीमार के हाथ से छुड़ा।