33 वाह! ख़ुदा की दौलत और हिक्मत और इल्म क्या ही अज़ीम है उसके फ़ैसले किस क़दर पहुँच से बाहर हैं और उसकी राहें क्या ही बे’निशान हैं।
34 ख़ुदावन्द की अक़्ल को किसने जाना?
या कौन उसका सलाहकार हुआ?
35 या किसने पहले उसे कुछ दिया है,
जिसका बदला उसे दिया जाए?
36 क्यूँकि उसी की तरफ़ से, और उसी के वसीले से और उसी के लिए सब चीज़ें हैं; उसकी बड़ाई हमेशा तक होती रहे आमीन।