9 पस क्या हुआ; क्या हम कुछ फ़ज़ीलत रखते हैं? बिल्कुल नहीं क्यूँकि हम यहूदियों और यूनानियों दोनों पर पहले ही ये इल्ज़ाम लगा चुके हैं कि वो सब के सब गुनाह के मातहत हैं। 10 चुनाँचे लिखा है
"एक भी रास्तबाज़ नहीं।
19 अब हम जानते हैं कि शरी’अत जो कुछ कहती है उनसे कहती है जो शरी’अत के मातहत हैं ताकि हर एक का मुँह बन्द हो जाए और सारी दुनिया ख़ुदा के नज़दीक सज़ा के लायक़ ठहरे। 20 क्यूँकि शरी’अत के अमल से कोई बशर उसके हज़ूर रास्तबाज़ नहीं ठहरेगी इसलिए कि शरी’अत के वसीले से तो गुनाह की पहचान हो सकती है।