12 मय अनुभव सी जानु हय, अऊर बढ़नो भी; हर एक बात अऊर सब दशावों म मय न सन्तुष्ट होनो, भूखो रहनो, अऊर घटनो-बढ़नो सिख्यो हय। 13 जो मोख सामर्थ देवय हय ओको म मय सब कुछ कर सकू हय।
12 मय अनुभव सी जानु हय, अऊर बढ़नो भी; हर एक बात अऊर सब दशावों म मय न सन्तुष्ट होनो, भूखो रहनो, अऊर घटनो-बढ़नो सिख्यो हय। 13 जो मोख सामर्थ देवय हय ओको म मय सब कुछ कर सकू हय।