11 याहवेह, महिमा, सामर्थ,
प्रताप, विजय और वैभव,
यानी सभी कुछ, जो स्वर्ग और पृथ्वी में है, आपका ही है.
याहवेह, प्रभुता आपकी ही है;
आपने अपने आपको सबके ऊपर मुख्य और महान किया हुआ है.
12 धन और सम्मान आपसे ही मिलते हैं;
आपकी प्रभुता सब जगह है.
अधिकार और सामर्थ्य आपके हाथ में हैं.
अपने ही अधिकार में आप मनुष्यों को ऊंचा करते
और उन्हें बलवान बना देते हैं.
14 "कौन हूं मैं और क्या है मेरी प्रजा कि हम ऐसे अपनी इच्छा से भेंट चढ़ा सकें? क्योंकि सभी कुछ आपसे ही मिलता है. हमने जो कुछ दिया है, वह हमको आपने आपके ही हाथों से दिया हुआ है. 15 हम तो आपके सामने अपने पुरखों के समान सिर्फ यात्री और परदेशी ही हैं. पृथ्वी पर हमारे दिन छाया के समान होते हैं, निराशा से भरे.