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1 Samuel 2

हन्‍थन

1 िहन्‍यह थना:

"दय हवें आनकर रहै;

हवींिै,

ैं वर ें शतिूंी,

ोंि ैं अपनजय ें आनिूं.

2 "पविरतें हवसमनहीं ै;

आपकअलसरनहीं ै;

हमपरमवर समचटनहीं.

3 "घमणें अब खतकर ,

ि अहभरें ुंिकले,

ोंि हववह परमवर ैं, सरवजैं,

वह मनों परखतरहतैं.

4 "ों धनिगए ैं,

मगर कमजउनकबल िगया.

5 े, भरपजन कर रहते, अब मजदिूंरहैं.

मगर अब, रहकरते, रहे.

वह ांकरती, आज जननै,

मगर वह, अनै, उसकिि दयनगई ै.

6 "हवैं, तथवनदैं;

वहअधें े, तथवहिकरतैं.

7 हवबने, तथवहधनबनैं;

वहिैं और वहउन्‍नत करतैं.

8 वह िधन ि उठैं,

वहदरिों भसउठकर उन्‍नत करतैं;

ि रधों मनसमििं,

तथपद पर ं.

"ींहवै;

उनोंइनीं पर पनै.

9 वह अपनरदरककरतरहतैं,

मगर ों धकें िःशबकर िै.

"ोंि यकि अपनबल रण िजयनहीं ा;

10 हविचकनकर िे.

हववरउनकििजलिे;

हवएक सरतक ै.

"वह अपनशकि-समपन्‍करतैं,

तथअपनअभििींकर ैं."

11 यह सब एलकनगर ें अपनघर गए, मगर वह लक िएलउपसिि ें रहकर हवकरनलगा.

एलों पविपद अवमनन

12 एलचरिे. उनकिहवअधिमहता; 13 और बलि चढ़ारकिें जनसरण िों ि ा. यह ि जब बलि चढ़ाी, और बरतन ें ांउबरहा, िवक एक तरफांिबरतन िकट आता, 14 वह इसबरतन ें लकर और ितनांतरफांें लगआता, उसिअपनिरख ा. ऐसनगर ें आए सभइसएलिों करते. 15 यहां तक ि ांिि चरजलपहलिवक आकर बलि चढ़ायकि आदे, "बरतन ें पहलििििांहमें कचि उसनकर रयिसके."

16 यदि बलि अरिकरनयकि उततर ें यह कहता, "वसजल ो, िवह ा," कहते, "नहीं, यह हम अभे; यदि नहीं े, हम बरदसे."

17 हवि ें यह बहा; ोंि ऐसकरतहवचढ़ागई बलि अपमकर रहे.

18 इस समय शमएल हवउपसिि ें रहतकर रहे. वह िों समवसरण करते. 19 जब उनकअपनपति िबलि चढ़ािवहां आती, वह लक शमएल िियमिऐसवसबनकर करती. 20 एलकतथउनकपतिएलइस रकआशिकरते: "हविइस रदकरें, ि िलक इसनहवसमरििै, उसकपन भर ." तब अपनघर े. 21 तब हवअपनि ें हन्‍ि ी. उसनगरभधरण िऔर उनकऔर िां . लक शमएल हवभवन ें िकसिचलगए.

22 इस समय एलबह़े े. उनें इसकचनि अपनइसएल यवहकर रहैं और उन िों िकरते, िें िरवपर िििा. 23 एलअपनों कहा, "सब ों कर रहो? इन सभों बरें सभिरहैं. 24 ो, यह गलत ै. आज हवरजें िों बर ै, वह नहीं ै. 25 यदि एक यकि िसरिकरे, उसकिपरमवर िनतभव ै; मगर यदि हविकरे, तब उसकिनतिरह ै?" मगर एलों उनकितरअसरहा, ोंि हवउनकिचय कर े.

26 इस समय लक शमएल बढरहा. उस पर हवि तथों बना.

एलपर हव

27 परमवर एक यकि एलआयऔर उनसकहा, "यह हवै: ैंवजों पर अपनआपक़-रकट नहीं िा, जब िें परिअधे? 28 इसएल ों ें ैंअपनििििि पर बलि अरपण करें, उस पर जलतथमनिों ििििकपड़ा, एफ़ोपहनकर मनउपसिकरें. ैंवजों यह आजि इसएलरजअरिअगिबलि िें ं. 29 िरण ि आवििबलिों तथों ैंआदिा, उनकअवहलनकर रहो? रजइसएल अरिसभों सरतम ों ा-कर वयरहैं! यह करतमनअपअपनों अधिसमिै?’

30 "इसलिहव, इसएल परमवर यह षणा, ैंयह अवशकहि तथवजों सदा-सरवदकरतरहा,’ मगर अब हवयह ै, अब ैं यह कभूंा! ोंि ैं उनें समूंा, समैं, तथनतैं, िे. 31 िकट ैं ि, जब ैं वल ा, परिबल कर ूंा, यहां तक ि परिें यकि कभ़ातक नहीं पहुंा. 32 तब ़िकर ुंधलों इसएल रहसमि वये. परिें कभयकि ़ा सका. 33 िपरिसदसैं िकरूंा, वह अपनदय दनें े-अपनों ि ा. सभशज मनों चलतलविे. परिहर एक यकि िधन वन जवें एगा.

34 " िइसकि ियह ि ों ों, तथििें ी: ों एक िें मर े. 35 जब यह सब एगा, तब ैं अपनिएक िवसनिकरूंा. वह दय और आतअभिकरा. उसकिैं उसकिरतरदकरूंा. वहसदा-सरवदिकरतरहा. 36 परिें रह एगा, वह उसकमनककर उससिांएक ि्‍िएक कड़े ििनतकरा. हर एक चनयह ी, "िें लगि, ि कम कम ैं एक कड़ा सकूं." ’ "

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