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1 Samuel 20

तन रक

1 इये. उनोंतन आकर उनसा, "िैंे, बत? कहां झस? अपरिैंिा, वह आज ों गए ैं?"

2 "असभव!" तन उनसकहा. "यह नहीं सकति हतो! िरण असरण िबतकरतनहीं. भलइस िषय झसों िे? नहीं. यह असभव ै!"

3 शपथ कर कहा, "िऔर गहरों पतै, तब उनोंयह सहसमझि इस िषय ें ें नको, अनयथुःिचलिओगे.’ वनहवतथशपथ, झसिएक पग ै."

4 तन इस पर ा, "बत, अब ैं िकर सकतूं?"

5 तब तन यह िा: "कल नवचउतसव ै. ि अनें उपसिरहनअपिै. ें अवकि ैं आज सरितक ें कर िं. 6 यदि िअनपसिि पत, उनसकहो, एक बहिअपनहनगर थलै. वहां उसकपरिबलि चढ़ाउतसव ै.’ 7 यदि िकहें, ै,’ नहीं, तब इसकमतलब ि वक रकिै. मगर यदि यह नतवह ं, यह समझ ि उनोंकरनिचय कर िै. 8 तब अपनवक रति रहना, ोंि मनहवमनअपनवक ांै. मगर यदि ि ें ैंअपरिै, वयो, आवशयकतै, इसमें ििकरनी?"

9 "कभनहीं!" तन कहा. "यदि यह पति िकरनिैं, ैं ें बता?"

10 तब तन कहा, "अब बत, ििगए रतिउततर िषय ें िकरा?"

11 तन उनसकहा, "आओ, हर ें चलें." जब ों ें पहुंगए.

12 तन कहा, "हव, इसएल परमवर गवैं. कल परसों लगभग इससमय, जब ैं अपनिमनयह िषय ़ूंा, यदि िषय ें उनकअचिे, ें ें इसकचनूंा? 13 मगर यदि िें ै, तब हवयह सब, तथइससअधितन करें, यदि ैं ें इसकिषय ें िकरूं, और ें इसकसमूं, ि यहां रकें िसको. हवउपसिि इसरकबनरहे, िरकिबनरही. 14 जब तक ैं िरहूं, पर हवअपरकट करतरहना, 15 मगर यदि , परिरति अपनअपकभा—ां, उस िि ें ी, जब हवशतअसिधरतपर िेंे."

16 तब तन यह कहतपरििी, "हवशतरतिें." 17 एक ितन शपथ ी, ोंि उनें बहिे. वसतन अपनों समिे.

18 तन उनसकहा, "कल नवचउतसव और आसन िरहतब सभमनअनपसिि पषएगी. 19 परसों उस पर, पतथरों िा, जहां पहलिे. वहीं ठहररहना. 20 ैं इस िकट ़ूंा, ें िलकपर रहूं. 21 जब ैं लडउन ों ूंा, ैं कहूंा, कर .और तब यदि ैं लडकहूं, वह ो, इसओर ैं,’ आओ उनें, तब यहां आना, ोंि वनहवशपथ, ििऔर णतरकिो. 22 मगर यदि ैं लडयह कहूं, ो! सरओर ैं,’ तब ें गना, ोंि हवें जनै. 23 ििषय पर हम ों चरै, उसकसदा-सरवदिहवहमगवैं."

24 तब कर ें िगए. नवचउतसव पर ि. 25 अपनििपर े, िकट ा. तन उनकमना. पति अबनऊल िकट े. आसन ा. 26 ऊल इस िषय ें रशनहीं िा; इस िें "उसकअवशगयै; वह ांिआज अशा. ां, वह अशा." 27 मगर जब सरिी, नवचिवस सरिी, आसन िा, ऊल तन ा, "रण िकल जन पर आया, आज ी?"

28 तन ऊल उततर िा, "एक बहआवशयक िझसथलअनमति ै. 29 उसनिनती, अनमति ो, ोंि हम अपनहनगर ें बलि अरपण कर रहैं. और आगरह िि ैं वहां ं, तब यदि पर ि ै, इयों ेंटकरनअनमति ि.इसलिआज वह इस ें िनहीं सकै."

30 यह नततन पर ऊल भडउठा, वह कहनलगे, "रष्‍और ि! ैं समझ नहीं रहा, ि अपनलजतथअपनां लजििपकरहै? 31 यह समझ े, ि जब तक इस पर ििै, तब तक ू, और रतििसका. अब और उसयहां कर , ोंि उसकििै!"

32 तन अपनिऊल रशिा, "ों उसकिि? िउसनऐसा?" 33 यह नतऊल ेंककर तन करना. अब तन यह िचय गया, ि उसकिहतिकलिैं.

34 अभितन जन उठ गए; नवचसरिउनोंजन िा, ोंि वह अपनियवहलजितथिे.

35 तन एक लडकर ेंटकरनें ियमिपर पहुंे. 36 उनोंउस लडआदिा, "कर उन ों ैं पर ूं." लडिा, तन एक उसकआगलककरतिा. 37 जब वह लडउस थल िकट पहुंा, तन रतउससकहा, "वह मसआगनहीं िै?" 38 तन िा, "जलकरो! ़ो िकरो!" लडउठकर अपनआया. 39 (यह सब रहा, इसकउस लडपतनहीं ा. रहसिऔर तन मधिा.) 40 इसकतन अपनशसउस लडइस आदौंि, "इनें कर नगर ."

41 जब वह लडवहां चलगया, पतथरों उस उठकर तन नमन िा. तब ों एक सरुंबन करतरहे—अधिरहे.

42 तन कहा, "यहां ांिवक ि, ोंि हमनहवें यह ांै, और तथतथशजों मधहव, हमगवैं.’ " तब वहां चलगए और तन अपनघर गए.

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