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Cânticos 1

1 शलरचिों .

ि

2 वह अपनबनों ुंबन करे!

ोंि खमधउततम ै.

3 िि्‍ईतों खद ै,

उणइतसमै;

इसलिआशचरनहीं ि कनआकरषण ेंो.

4 अपनि हम ों चलं!

अपनकमरों ें आए ैं.

सहिां

हम ममें आनिमगन ोंी;

हम खमधणगकरेंी.

ि

रति उनकआकरषण.

5 ांवलअवशै, मगर ैं ुंदर ूं,

शलकन,

सम,

शलपरों सम.

6 इस तरह ि ैं ांवलूं,

यह ें लसनै.

पर गए;

उनोंबगखरजवबदौंी,

मगर ैं अपनबगरख सकी.

7 णपि, यह बतो, कहां ैं चर,

जहां अपऩ-बकरिां चरो,

वह जगह जहां पहर ें उनें आरिो?

ोंि ैं िों ़-बकरिों उसकसमों बनूं,

अपनुंिरखतै?

िरगण

8 िों ें परम ुंदरी, यदि वयें यह नहीं ै,

़-बकरिों ांिों पर चलत

और अपनमनों चरवों

चर.

यक

9 ियतमा, िो,

रथों ़ी.

10 गहनों ुंदर लगतैं,

ों गरदन.

11 हम िऐसगहनगढ़ेंे,

ांें जड़े ोंे.

ि

12 जब महे,

इतअपनशबरहा.

13 ियतम िउस गनधरस ै,

तनों रहतै.

14 ियतम िेंहदों समै,

एन-गों बगों ें ैं.

यक

15 ियतमा, ितनुंदर !

ओह, तव ें ितनुंदर ो!

ें कबतरसमैं.

ि

16 ितनुंदर लगतो, , ियतम!

तथआननद-दयक ी!

तव ें ितनभवहमिा.

यक

17 हमघरों धरनें वदैं;

तथछतें सनवर ी.

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