8 इतना थकाने वाला है सभी कुछ,
कि मनुष्य के लिए इसका वर्णन संभव नहीं.
आंखें देखने से तृप्त नहीं होतीं,
और न कान सुनने से संतुष्ट.
8 इतना थकाने वाला है सभी कुछ,
कि मनुष्य के लिए इसका वर्णन संभव नहीं.
आंखें देखने से तृप्त नहीं होतीं,
और न कान सुनने से संतुष्ट.