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उद्बोधक 5:10-15

OHSS Hindi Contemporary Version

10 जो धन से प्रेम रखता है, वह कभी धन से संतुष्ट न होगा;

और न ही वह जो बहुत धन से प्रेम करता है.

यह भी बेकार ही है.

11 जब अच्छी वस्तुएं बढ़ती हैं,

तो वे भी बढ़ते हैं, जो उनको इस्तेमाल करते हैं.

उनके स्वामी को उनसे क्या लाभ?

सिवाय इसके कि वह इन्हें देखकर संतुष्ट हो सके.

12 मेहनत करनेवाले के लिए नींद मीठी होती है,

चाहे उसने ज्यादा खाना खाया हो या कम,

मगर धनी का बढ़ता हुआ धन

उसे सोने नहीं देता.

13 एक और बड़ी बुरी बात है जो मैंने सूरज के नीचे देखी:

कि धनी ने अपनी धन-संपत्ति अपने आपको ही कष्ट देने के लिए ही कमाई थी.

14 उसने धन-संपत्ति निष्फल जगह लगा दी है,

वह धनी एक पुत्र का पिता बना.

मगर उसकी सहायता के लिए कोई नहीं है.

15 जैसे वह अपनी मां के गर्भ से नंगा आया था,

उसे लौट जाना होगा, जैसे वह आया था.

ठीक वैसे ही वह अपने हाथ में

अपनी मेहनत के फल का कुछ भी नहीं ले जाएगा.

Em outras traduções

  1. HSB Hindi Standard Bible

    10 जो धन से प्रेम रखता है वह धन से संतुष्‍ट नहीं होगा, और धन-संपत्ति से प्रेम रखनेवाला भी उसके लाभ से संतुष्‍ट नहीं होगा। यह भी व्यर्थ है। 11 जब संपत्ति बढ़ती है तो उसके खानेवाले भी बढ़ते हैं। अतः उसके स्वामी को इसके अतिरिक्‍त क्या लाभ होगा कि वह संपत्ति को अपनी आँखों से देखकर तृप्‍त हो? 12 श्रमिक चाहे थोड़ा खाए या बहुत, उसे मीठी नींद आती है; परंतु धनी को उसके धन की बहुतायत सोने नहीं देती।

    13 मैंने संसार में एक दुखदायक बुराई देखी है : धन का स्वामी उसका संचय अपनी ही हानि के लिए करता है। 14 वह धन किसी विपत्ति में नष्‍ट हो जाता है, और उसके घर पुत्र उत्पन्‍न होता है परंतु उसके हाथ में कुछ नहीं होता। 15 जैसे वह अपनी माँ के गर्भ से नंगा आया था, वैसे ही नंगा लौट जाएगा। वह अपने परिश्रम के फल में से कुछ भी अपने साथ नहीं ले जा सकेगा।

  2. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    10 जो रुपये से प्रीति रखता है वह रुपये से तृप्त न होगा; और न जो बहुत धन से प्रीति रखता है, लाभ से यह भी व्यर्थ है।

    11 जब सम्पत्ति बढ़ती है, तो उसके खानेवाले भी बढ़ते हैं, तब उसके स्वामी को इसे छोड़ और क्या लाभ होता है कि उस सम्पत्ति को अपनी आँखों से देखे?

    12 परिश्रम करनेवाला चाहे थोड़ा खाए, या बहुत, तो भी उसकी नींद सुखदाई होती है; परन्तु धनी के धन बढ़ने के कारण उसको नींद नहीं आती।

    13 मैंने सूर्य के नीचे एक बड़ी बुरी बला देखी है; अर्थात् वह धन जिसे उसके मालिक ने अपनी ही हानि के लिये रखा हो, 14 और वह धन किसी बुरे काम में उड़ जाता है; और उसके घर में बेटा उत्पन्न होता है परन्तु उसके हाथ में कुछ नहीं रहता। 15 जैसा वह माँ के पेट से निकला वैसा ही लौट जाएगा; नंगा ही, जैसा आया था, और अपने परिश्रम के बदले कुछ भी न पाएगा जिसे वह अपने हाथ में ले जा सके। (1 तीमु. 6:7)

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