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यहेजकेल 26

िभवियव

1 रहवें वररहवें महपहलि, हववचन आया: 2 "मन, ोंि शलिषय ें यह कहै, आहा! जनतरवगयै, और इसकटक िगयैं; वह गई ै, इसलिअब ैं उन्‍नति करूंा,’ 3 इसलिपरम रधहवयह कहनै: , ैं िूं, और ैं िबहि ों समलहरों समा. 4 ों वसकर ेंऔर उसकों िेंे; ैं उसकिरचकर उसएक चटबनूंा. 5 हर समें, वह मछलएगा, ोंि ैंकहै, परम रधहवषणै. वह ि-ि ों िएगा, 6 और ि ें उसकबसतलवनषकर िएगा. तब ेंि ैं हवूं.

7 "ोंि परम रधहवयह कहनै: ैं उततर ििनबकदना. वह ़ों, रथों, सवों और एक बड़ी आएगा. 8 वह ि ें बसतलवकर ा; वह िकरा, ों ढलबनएगऔर िअपनउठएगा. 9 वह ों पर चलएगऔर अपनहथिों ों िा. 10 उसक़े इतनोंि उनकओगे. ें ़-ा, पहि़ी और रथों आवांउठेंजब वह रवों इस रकरवकरा, िरकों कर शहर तर आतैं. 11 उसक़ों ों सब गलिां ौंी; वह ों तलवा, और मजबपर ििे. 12 धन-सपति और वसेंे; ों िेंऔर ुंदर घरों नषकर ेंऔर पतथर, इमरतलकड़ी और ़ा-करकट ें ेंेंे. 13 ैं हलपों कर ूंा, और िनहीं ा. 14 ैं ें एक चटबनूंा, और मछलों एक बन ओगे. नरििकभा, ोंि ैं हवकहै, परम रधहवयह षणै.

15 "परम रधहवयह कहनै: समरतट ि िरनआवांनहीं उठी, जब यल यकि करेंऔर हतोंी? 16 तब समरतट सब जकअपनिंसन उतरेंऔर अपनलबें रख ेंऔर अपनिकपड़े उतेंे. आतिकपड़े पहनकर, हर षण ांपत, मसभयभकर पर े. 17 तब िषय ें एक िपगेंऔर मसकहेंे:

" रसिशहर, नषगए,

समरतट पर ममें बसे,

समपर एक शकि े,

और िी;

मनउन सब पर अपनआत

वहां रहते.

18 अब समरतट ि

िरनिांपतै;

सम

िरनभयभैं.’

19 "परम रधहवयह कहनै: जब ैं ें एक उजशहर बनूंा, उन शहरों जहां अब नहीं रहता, और जब ैं समगहरऔर उसकअथऊपर आऊा, 20 तब ैं ें उनकआऊा, बहपहलों गडें ैं. ैं ें िकरवा, पतन तरह उन ों , गडें ैं, और ििों ें जगह ी. 21 ैं भयनक करूंऔर असिसम्‍एगा. ें एगा, परिकभपतचला, परम रधहवषणै."

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