6 क्योंकि प्रभु अनुशासित उन्हें करते हैं,
जिनसे उन्हें प्रेम है तथा हर एक को,
जिसे उन्होंने पुत्र के रूप में स्वीकार किया है, ताड़ना भी देते हैं."12:5-6 सूक्ति 3:11, 12
7 सताहट को अनुशासन समझकर सहो. परमेश्वर का तुमसे वैसा ही व्यवहार है, जैसा पिता का अपनी संतान से होता है. भला कोई संतान ऐसी भी होती है, जिसे पिता अनुशासित न करता हो?