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इब्री 5

1 हर एक महिमनों ें और मनों िपरमवर िों िि ों िेंतथबलि ों चढ़ाकरे. 2 उसमें अजों तथे-भटकों नमयवहकरनषमतोंि वह वयिबलतअधै. 3 इसलियह आवशयक ि वह ों िबलि चढ़ाकरे—ों ितथवयअपनि. 4 ियकि यह समअपनिनहीं परपरमवर हट ्‍ै, ो.

5 इसरकमसमहिपद पर ठनिवयनहीं िपरउनोंे, िोंउनसयह कहा,

"ो;

आज ैं िूं."5:5 स्तोत्र 2:7

6 उनोंसरजगह कहै,

"लख़ेृंखलें,

एक अनिो."5:6 स्तोत्र 110:4

7 अपनें रहनसमय ें उनोंशबें , उनकमनथनऔर िनती, उनें बचसकते, उनकपरमवर ें भकि रण उनकथनगई. 8 पर ी, उनोंअपनुःउठआजननिी. 9 ि, िििवह वयउन सबकि, उनकआजलन करतैं, अनउदरण बन गए; 10 ोंि वह परमवर लख़ेृंखलमहिगए े.

िें अपिरगति

11 हमइस िषय ें कहनिबहतथइसकवरणन करनकठिोंि अपनननषमतो. 12 समय अनें अब तक िषक बन ििंअब आवशयक यह गयि ें परमवर ईशवरवचनों िांों िे. ें आहनहीं, रत गई ै! 13 वह वन करतै, िकतिअपरििै, ोंि वह िै. 14 आहसयों िै, िोंलगअभअपनिों इसकरति िबनिि सहऔर गलत.

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