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विलापगीत 4

1 गया,

ें े!

हर एक गलपर

पविपतथर िखरपड़े ैं.

2 ़िउत,

िनकउतवरै,

अब िों-सद

हसतकि रहैं!

3 िअपनबचों

तनपकरै,

िंरजै,

मरि रमों सद.

4 अतिशय रण धमुंि

उसकिपक गई ै;

लक जन चनकरतैं,

िंजन नहीं रहा.

5 िनकआहउतजन करता,

आज गलिों ें नषरहैं.

िनकपरिैंगनवसकरते,

आज भसें ैं.

6 रजपर पड़ा अधर

कहीं अधिरचै,

ितक नहीं लग

और खतखतउसकसरवनगया.

7 उस नगरसक िअधिि,

अधिे,

उनकूंअधिी,

उनकरचनलम ौंदरअधिउती.

8 अब उनीं खमडल मवररह गए ैं;

चलतउनें पहचननभव नहीं रहा.

उनकवचिकर असिों िपक गई ै;

वह ठ-सदै.

9 ठतर कहे, िनकतलवरही,

उनकअपा, िनक;

ल-घकर कर गए

ोंि ें उपज सकी.

10 उन करमये,

िोंअपनअपनआहबनिा,

जब रजिें

लक उनकआहबनगए े.

11 हवअपनरवणत

ििा.

उनोंअपनभडिऔर िउनों़िें ऐसअगि रजवलिकर ी,

िसनइसकों भसकर िा.

12 ो,

और ििों इसकि,

ि िएवशतशल

रवों रवसका.

13 इसकरण उसकभवियवक

तथउसकिों िठता,

िोंनगर मध

धरिों रकतपिा.

14 अब नगर गलिों ें िों-सदभटक रहैं;

रकऐसिैं

ि उनकवसों

परकरनहस नहीं कर रहा.

15 उनें िउठतै, ", अश!

, ! मत उसे!"

अब िपते, गतभटक रहैं,

ों ें सभयहकहतिरतैं,

"अब हममधें िनहीं कर सकते."

16 उनें हवइस तरह िखरिै;

अब हवनहीं रह गए.

िसमरह गए ैं,

और वज ि.

17 हमिगए,

सहयतआशयरि;

हमनउस सहयतआशी,

िसमें हमसहयतषमती.

18 उनोंइस ि हमकरनकर िा,

ि पर हमआना-भर गया;

हमिकट आतगई, हमवनकिमटतचलगया,

वसहमवन सम्‍गया.

19 े, हमकर रहे,

उनकगति आकशगगऱों ी;

उनोंपरवतों तक हमि

और िजन रदें हमें रहे.

20 हवअभिि, हमवन ां

उनकफनों ें े.

हमियह रहा,

ि उनकछतरछें हम ों मधिकरतरहेंे.

21 एदी, , उजें िकरतो,

हरें मगन .

तक पहुंा;

मदमतकर णतिवसओगी.

22 ़िी, िपन्‍गयिठत;

अब वह ें िसन ें रहनेंे.

िंएदी, वह िठतिकरेंे,

वह रकट कर वजनिकर ेंे.

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