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विलापगीत 1

1 अकरह गई ै,

यह नगरिसमें कभमनों करता!

िधवसदवरगयइसका,

ों ें सरकरती!

कभरदों मधजक

आज बन ै.

2 ि ें िलख-बिलखकर रहतै,

अशउसकों पर खतनहीं.

उसकअनक-अनिों ें

अब उसांवनिरहा.

उसकसभिों उससछल िै;

वसअब उसकशतबन ैं.

3 यहििसन रण

उसक़ा तथउसककठसत.

अब वह अनों मधें ै;

िंउसकिअब िथल रह गया;

उसक़ा िि ें उसककर रहे,

उनोंउसपकड़ा.

4 ़ििैं,

ििउतसवों िनहीं पहुंरहा.

समसनगर रवनसैं,

िकररहैं,

नवयवतिों घसगयै,

नगरकषै.

5 आज उसकशतअधयकबनैं;

आज समि उसकशतपकें ै.

ोंि हवउस़ििै.

ोंि उसकअपरअसे.

उसकलक उसकखते-खतशत

आई ें गए ैं.

6 ़ि

उसकभव िै.

उसकअधिअब उस िरण-सदगए ैं,

िचर्‍नहीं रहा;

उनकसमक, उनककर रहैं,

बलहकर रहैं.

7 अब इन ़ा िों ें, इन भटकिों ें

शलमरण रहवह ,

जब वह अमवसिी.

जब उसकगरिशतअधिें पड़े,

जब सहयतिरह गया.

उसकशतबड़े ें उसिरहैं,

वसउसकपतन उपहकर रहैं.

8 शलि

परिमसवरवह अशगई.

उन सबकउससगई, िनकिवह ी,

ोंि उसकिलजजतरतयकषदरैं;

वसअब वहकरहत

अपनरहै.

9 उसकदगउसकवसों ें ी;

उसनअपनभविरखा.

इसलिउसकपतन ऐसै;

अब िउसांवन्‍नहीं रही.

"हव, ़ा पर ि ि,

ोंि जय शतै."

10 शतअपनउसकसमसरव

ओर िकर रखै;

उसकखते-खतजनत

उसकपविें बलरवकर िै,

उस पविें,

जहां रवआपकसभतक िवरिा.

11 उसकसभगरिकरहत

जन कर रहैं;

अपनयववसििमय जन िकर रहैं,

ि उनमें शकि सके.

"हव, ि, ि,

ोंि ैं ूं."

12 "सभि, इस कर िकल ो, यह िनहीं?

करको.

ि कहीं पर आई दनगई ै,

गई वह दना,

हवअपनउगि

पर रभकर ै?

13 "उचहवअसिों ें अगि लगी,

यह अगि उन पर रबल रही.

ों िहविि

और उनोंिा.

उनोंिि,

िजन एवमनबल िकर िै.

14 "अपरपर बनिगए ैं;

उनें हवूंिै.

गलपर पड़े ैं,

बल उनोंिफल कर िै.

हवउनकअधकर िै,

ैं िनकमनकरनें असमरूं.

15 "रभसभ

अयिकर िै;

हमे,

उनोंिएक ऐसिििकर िजब वह चल ेंे.

रभयहिुंकनऐसचल िै,

रसकुंें चलै.

16 "यहसब रण ैं

और ों रहअशबहतै.

ोंि झसअतांवना,

िसमें झमें नवजवन करनषमतै.

लक अब िसहरह गए ैं,

ोंि शतरबल गयै."

17 ़िअपनैं,

नहीं, उसांवनसके.

ें हवआदरसिै,

ि सभआस-पबनरहतैं, वसउसकशतैं;

उनकमधअब शल

एक िवसकर रह गयै.

18 "हवसचैं,

ििैंउनकआदििै.

अब सभयह ें;

तथइस दनें.

वक एववतिां

आई ें ैं.

19 "ैंअपनिों ा,

िंउनोंिा.

िएववज

नगर ें नषैं,

जब वयअपनशकि ्‍ि

उदजन रहे.

20 "हव, ओर ि ि!

ोंि ैं ़ा ें ूं,

अतरचआतदना,

अपनइस िकट िरण तर ें दय अतयगै.

हर तलवें सकिै;

यहां आवें ्‍ै.

21 "उनोंकरहट ै,

रहांवनसके.

समसशततक इस िसमपहुंै;

आपनिै, उस पर आनमनैं.

उततम यह ि आप उस िरपकर िसकआप वघषणकर ैं,

ि शतसदे.

22 "उनकसमसि आपकसमकरकट ;

आप उनकवहयवहकरें,

आपनि

समसअपरपरिमसवर.

गहन करहट

तथरह गयमनबल."

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