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स्तोत्र 98

एक .

1 हविएक नय,

ोंि उनोंअदिैं;

उनकें तथउनकपवि

जय ्‍ै.

2 हवों पर अपनउद

तथअपनिकतपरमवर रकिै.

3 इसएल िउनोंअपनकरा-

तथसचनहीं;

र-छतक ों हम

परमवर उदिै.

4 हविसमसआनउचवर ें रसो,

गत पर हरउमडपड़ें;

5 पर हवतवन करे,

ां, ि्‍गत पर मधा.

6 रहिों तथ़ाउचहव,

हमा, िउचवर ें हरि.

7 समतथइसमें मगन सभउसकहरषनकरें,

और इसकिी.

8 नदिां िां बजं,

परवत िलकर हरषगं;

9 सभहवउपसिि ें ं,

ोंि हवआनैं. करनिरहैं.

उनकिकतें ा;

वह मनों अपनसचअनकरेंे.

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