Pular para o conteúdo
Publicidade

स्तोत्र 64

िशक िे. एक .

1 परमवर, थनि, जब आपकमनैं अपनियत रसकर रहूं;

शतआतवन रकिरखि.

2 करिों षड़्‍े,

ों ि रकिअपनआडें ि.

3 उनोंतलवसमअपनकर रख

और अपनशबों लकपर ऐसैं, तक ों ो.

4 िें ठकर चलैं;

िडर कर अचनक रहकरतैं.

5 एकजिों िएक सरउकसैं,

िपकर िजनबनैं;

कहतैं, "सकहमें?"

6 िजनबनकर कहतैं,

"अब हमनसतजनकर ै!"

इसमें नहीं ि नव दय और करण समझ कठिै.

7 परमवर उन पर अपऩेंे;

एकएक यल िपड़ेंे.

8 परमवर उनकउनीं िकर ें

और उनकिएगा;

सभी, उनें ेंे, ें अपनििे.

9 समसमनों पर आतएगा;

परमवर महषणकरेंे,

परमवर महपर िकरतरहेंे.

10 धरहवें हरिकर,

उनकआशरय ें

और सभमनवउनकतवन करें!

Estes versículos te tocaram? Ore agora!

+581 estão orando agora.

Junte-se à corrente de oração.

Veja também