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स्तोत्र 130

आरधनििों .

1 हव, गहरइयों ें ैं आपकरहूं;

2 रभु, वर ि,

िनमिनत

ओर आपकलगरहें.

3 हव, यदि आप अपरों रखनलगें,

रभु, ठहर सका?

4 िंआप षमैं,

तब आप रदैं.

5 े, ों ो, हवरतरहतै,

उनकवचन पर ैंआशरखै.

6 रभरत

उन रखवों अधि, िें दय रतरहतै,

वसउन रखवों कहीं अधििें रतरहतै.

7 इसएल, हवपर भररखो,

ोंि जहां हवैं वहां करा-

और वहटकैं.

8 वयवहइसएल ो,

उनकअपरों षमकरेंे.

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