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स्तोत्र 50

आसफ एक .

1 वह, सरवशकिैं, हव, परमवर,

दय तक

िकरतैं.

2 ़िपरम ौंदरें,

परमवर िरहैं.

3 हमपरमवर रहैं,

वह ििनहीं रह सकते;

उनकआगे-आगभसमकअगि चलतै,

और उनकों ओर रची.

4 उनोंआकतथआहिा,

ि अपनरजय-परकिकरें.

5 उनोंआदिा, "भकों एकतकरो,

िोंबलि अरपण झसिै."

6 आकउनकिकति करतै,

ोंि परमवर यकैं.

7 "रजा, ो, ैं कह रहूं;

इसएल, ैं िरहूं,

परमवर ैं ूं, परमवर.

8 बलिों रण ैं ें ांनहीं रह

और ैं अगिबलिों आलचनकर रहूं, िअरिरहैं.

9 पशआवशयकत

और ुंिबकरी,

10 ोंि हर एक वनपशै,

हजों पह़िों पर चर रहपशैं.

11 परवतों ें बससमसपकिों ैं नतूं,

ें चलतिरतसब ैं.

12 तब यदि ैं मसनहीं कहता,

ोंि समसतथइसमें मगन सभवसैं.

13 ों ांआह

और बकरों रक?

14 "परमवर धनयवबलि अरिकरो,

सरपरमवर िअपनरतिकरो,

15 तब कट ें ो;

ैं उदकरूंऔर समे."

16 िंे, परमवर कहतैं:

"जब िकरते,

और िों नतो?

17 अधिें यवसचन करने,

अथवलना?

18 खतउसको;

यभििों यभिें समििो.

19 मनअपनिसमरिकर िै,

छल-कपट िततपर रहतै.

20 ितर अपनिंकरतरहतो,

अपनसगिगललगरहतो.

21 यह सब करतरहे, िंैं रहा,

और यह समझतरहि ैं मससहमत ूं.

िंैं अब पर सन करूं

और समपर आरलगा.

22 ", परमवर लनगए ो, िकरो,

ऐसि ैं ें कड़े-कड़े कर नषकर ूं और रककर सके:

23 धनयवबलि अरिकरतै, समकरतै,

ैं उसे, सनआचरण करतै, परमवर उदअनभव करवा."

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