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स्तोत्र 149

1 हवतवन ो.

हविएक नय,

भकों सभें उनकतवन ि.

2 इसएल अपनकरें आनिो;

़िसनतति अपनें उल्‍लसिो.

3 उनकमहिें तवन करें;

जरऔर ि्‍गत पर करें.

4 ोंि हवआनउनकरजें मगन ै;

वह उदिकरतैं.

5 िउनकपररम ें रफिरहें,

यहां तक ि अपनिपर हरें रहें.

6 उनककणें परमवर िसरदन

तथउनकों ें तलवो.

7 अनों पर रति

तथउनकरजपर िततपर रहें,

8 ि उनक़िों ें बन

और उनकअधिों ें,

9 ि उनकिििि,

यह उनकसमसभकों समा.

हवतवन ो.

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