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स्तोत्र 76

िशक िे. ों गत . आसफ एक . एक .

1 यहिरदें परमवर नतैं;

इसएल ें उनकबसै.

2 नगर ें उनकआवै,

और उनकलय ़िनगर ें.

3 यह वह ै, जहां उनोंआगों ो,

और तलवों ा.

4 आप अतजवल ि उजजवल ैं,

िपदपरिपरवतों कहीं अधिभव.

5 रवों सब िगया,

िर-निें समगए;

एक ें

इतनमररहि इस.

6 परमवर, ऐसरचआपकफटक,

ि अशऔर रथ ों नषगए.

7 आप इस ैं ि आपकरति रदरख.

जब आप उदैं तब िसमें आपकमनठहरनषमतै?

8 जब वरआपनअपनिणय रसिि,

भयभकर गई.

9 परमवर, आप उस समय िमर,

ि ़िों ़ा ि.

10 िःों रति आपकआपकरति रशिकरतै,

तब े, आपकरह गए े, आप उनें ििएवधरममय करेंे.

11 जब मननत ो, परमवर, अपनहविकरो;

सभिकटवरउनें ेंअरिकरें,

रदा-भय अधिैं.

12 वह सकों मनबल ैं;

समसिवह आतैं.

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