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स्तोत्र 43

1 परमवर, िरमिि,

रद़ी ि

पकें िणय ि.

लनों एवों

ि.

2 ोंि आप वह परमवर ैं, िनमें बल ै.

आप ों गए?

शतरहतनरण,

िों पडरहै?

3 अपनि तथअपनसति,

उनें अगकरनि;

ि ैं आपकपविपरवत तक पहुंसकूं,

आपकआवै.

4 तब ैं परमवर िकट सकूंा,

वहपरमवर, परमैं.

तब परमवर, परमवर,

ैं ि्‍गत पर आपकदनकरूंा.

5 , ऐसि्‍ों ो?

ों दय ें ऐसगए ो?

परमवर पर भररखो,

ोंि यह सब

ैं हवतवन करूंा.

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