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स्तोत्र 11

िशक िे. रचन

1 ैंहवें आशरय िै,

िझसयह ों कह रहो:

"समअपनपरवत उडा.

2 वध! अपनधनिै;

और उसनधनपर चढ़ा िै,

ि धकें

ों हतकर े.

3 यदि आधनष,

धरिकलरह ै?"

4 हवअपनपवििें ैं;

उनकिंसन वरें बसै.

उनकि सरवतमनों खतै;

उनकमदि हर एक परखतरहतै.

5 हवि धरएवों परखतै,

हवआतिं

िों करतैं.

6 ों पर वह फनों ि करेंे,

उनकें उनकअगि;

धक तथरचहवा.

7 हवैं,

धरउनें िैं;

धरजन उनकुंखने.

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