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स्तोत्र 60

िशक िे. "शन एद" पर आधि. िकत60:0 शीर्षक: शायद साहित्यिक या संगीत संबंधित एक शब्द रचना. यह िि. िगयै. यह उस िि दरजब अरम-नहरयिऔर अरम-ज़ोों धरत े. उससमय पति आब नमक ें टतरह हजएदिों िा.

1 परमवर, आपनहमें ििा, आप हम पर पड़े ैं;

आप हमसिगए ैं. अब हमें अपनि!

2 आपना, धरतफट गई ी;

अब कर इसांकर ि, ोंि यह ांरहै.

3 आपनअपनरजिषम परिििों अनभव करा;

आपनहमें िवह खमधी, िसकवन हमांलडखड़ा गए,

4 िंअपनरदिआपनएक वजउठै,

ि वह सतरतवररदरि.

5 अपनें हमें ़ाकर हमें उततर ि,

ि आपकि़ासकें.

6 परमवर अपनपविें षणै:

"अपनिजय ें ैं ििकरूं

तथैं कर टवकर ूंा.

7 िलआद पर अधिै, मनशपर अधिै;

एफईम िरखवै,

यहजदै.

8 आब ै,

और एदपर ैं अपनेंूंा;

िििऊपर उचवर ें जयघकरूंा."

9 एग़-रकिनगर तक?

पहुंएगएदनगर तक?

10 परमवर, आप नहीं, िोंहमें अब िि

और हमिै?

11 शतिहमसहयति,

ोंि िमनगयसहयतिररथक ै.

12 परमवर िलकर हमिजय ििै,

वहहमशतचल ा.

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