Pular para o conteúdo
Publicidade

स्तोत्र 21

िशक िे. एक .

1 हव, आपकशकि पर हरिै.

आपकरदिगयउदहरिखतबनतै!

2 आपनउसकदय मनरथ िै,

आपनउसकअनकरनें असनहीं िा.

3 आपनउतआशों उसकगत िै,

आपनउसकिदन ििै.

4 आपसवन थनी, आपनउसवनदिा—

ां, सदवन.

5 आपकिगयिजय महिै;

आपनउसऐशवरएविििै.

6 िःआपनउससरवदिआशें रदैं,

अपनउपसिि आनआपनउसउल्‍लसििै.

7 यह इसलिि महभरहवपर ै;

सरपरमवर करा, रण

अटल रहा.

8 आप समसशतूंिेंे;

आपकबल उन सभकर एगा, आपसकरतैं.

9 आपकरकट पर,

सभजलतभटें जल े.

अपनें हवउनें िगल एगा,

उनकअगि उनें भसकर ी.

10 आप उनकसनतति िेंे,

उनकशज मनों मधनहीं रह े.

11 यदयपि आपकिउनकजनकरन

तथि रचेंे, सफल े.

12 ोंि जब आप धनउन पर िलगे,

आपकरण िकर खड़े ोंे.

13 अपनशकि ें, हव, आप ं;

हम आपकमरणगकरेंे.

Estes versículos te tocaram? Ore agora!

+581 estão orando agora.

Junte-se à corrente de oração.

Veja também