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स्तोत्र 87

ों रचना. एक . एक .

1 पविपरवत पर उनोंअपनींै;

2 समसआवों अपा,

हव़िकहीं अधििैं.

3 परमवर नगर,

िषय ें यशसें िगई ैं,

4 "अपनपरििों मधैं

87:4 राहाब मिस्र देश के लिए एक काव्य नाम और करूंा,

िििा, और 87:4 कूश यानी इथियोपिया ी,

और िैं कहूंा, यहवह, िसकउतपति ़िें ै.’ "

5 ़ििषय ें यहषणएगी,

"इसकजऩिें और उसकी,

सरपरमवर ़िबसै."

6 हवअपनरजगणनकरतसमय िा:

"इसकजऩिें ा."

7 गत पर े,

"ीं ें आनसमसउगम ैं."

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