Pular para o conteúdo
Publicidade

स्तोत्र 82

आसफ एक .

1 वरिमहसभें परमवर अपनरहण िै;

उनों"वतं" मनअपनिणय िै:

2 कब तक अनसमरथन करतरहे,

कब तक अनपकषपकरतरहे?

3 ुःतथिपककरो;

दरिों एवुःिों अधिों रककरो.

4 बल एवों ़ा ो;

उनें बचो.

5 "नहीं नते, नहीं समझते.

धकें आगबढरहैं;

समसआधडगमगगए ैं.

6 "ैंकहा, "ईशवर" ो;

सभसरपरमवर ो.’

7 िंसभसरमनों ी;

पतन अनसकों समा."

8 परमवर, उठकर ि,

ोंि समसों पर आपकरभै.

Estes versículos te tocaram? Ore agora!

+581 estão orando agora.

Junte-se à corrente de oração.

Veja também