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स्तोत्र 47

िशक िे. ों रचना. एक .

1 समसो, िां बज;

हरें परमवर जय जयककरो.

2 हव, सरपरमवर भय-यैं,

वहसमसऊपर पररमैं.

3 उनीं जनतहमअधकर िै,

हमों गए ैं.

4 उनीं हमिििििै,

यहरव ै, उनकिै.

5 जय जयकवनि मधपरमवर ऊपर उठगए,

रहमधहवऊपर उठगए.

6 ि ें परमवर दनकरो, दनकरो;

ि ें हमिदनकरो, दनकरो.

7 परमवर िैं;

उनकसमें एक तवन रसकरो.

8 ों पर परमवर सन ै;

परमवर अपनमहिंसन पर िजमैं.

9 अबपरमवर रजें

जनतअधयकएकतैं,

ोंि ों पर परमवर अधिै;

परमवर अतैं.

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