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स्तोत्र 85

िशक िे. ों रचना. एक .

1 हव, आपनअपनपर ि ै;

आपनसमि ििै.

2 आपनअपनरजअपरषमकर िैं

तथउनकसभों ांिै.

3 आपनअपनांकर ि

तथआप अपनगए ैं.

4 परमवर, हमउदरकरा, हमसमि िकर ि,

हमिअपनिि.

5 हमरति आपकसदरहा?

आप अपनसभ़िों तक बनरखेंे?

6 आप हमें िनहीं,

ि आपकरजआप ें रफिसके?

7 हव, हम पर अपनकरा-85:7 करुणा-प्रेम मूल में ख़ेसेद इस हिब्री शब्द के अर्थ में अनुग्रह, दया, प्रेम, करुणा ये सब शामिल हैं रदरिि,

और हमें अपनउदरदि.

8 हवपरमवर कहेंे, वह ैं ूंा;

उनोंअपनरजा, अपनभकों ििांि रतिै.

िंउपययह ि खतकरें.

9 इसमें नहीं ि उनकओर उदउनीं िििै,

उनकरदैं, ि हमें उनकभर .

10 करा-तथसचआपस ें िगई ैं;

िकततथांि एक सरुंबन िा.

11 सचउगतरहै,

िकतवरयह रहै.

12 इसमें नहीं ि हववहरदकरेंे, उततम ै,

और धरतअपनउपज ी.

13 िकतआगे-आगचल

और वहहमकदम िकरतै.

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