अय्योब के साथ में मनुष्य एवं परमेश्वर के मध्य मध्यस्थ कोई नहीं
1 तब अय्योब ने और कहा:
2 "वस्तुतः मुझे यह मालूम है कि सत्य यही है.
किंतु मनुष्य भला परमेश्वर की आंखों में निर्दोष कैसे हो सकता है?
3 यदि कोई व्यक्ति परमेश्वर से वाद-विवाद करना चाहे,
तो वह परमेश्वर को एक हजार में से एक प्रश्न का भी उत्तर नहीं दे सकेगा.
4 वह तो मन से बुद्धिमान तथा बल के शूर हैं.
कौन उनकी हानि किए बिना उनकी उपेक्षा कर सका है?