19 उठो, रात्रि में दोहाई दो,
रात्रि प्रहर प्रारंभ होते ही;
जल-सदृश उंडेल दो अपना हृदय
अपने प्रभु की उपस्थिति में.
अपनी संतान के कल्याण के लिए
अपने हाथ उनकी ओर बढ़ाओ,
उस संतान के लिए, जो भूख से
हर एक गली के मोड़ पर मूर्छित हो रही है.
19 उठो, रात्रि में दोहाई दो,
रात्रि प्रहर प्रारंभ होते ही;
जल-सदृश उंडेल दो अपना हृदय
अपने प्रभु की उपस्थिति में.
अपनी संतान के कल्याण के लिए
अपने हाथ उनकी ओर बढ़ाओ,
उस संतान के लिए, जो भूख से
हर एक गली के मोड़ पर मूर्छित हो रही है.
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