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Lamentações 2

2:0 यह अध्याय एक अक्षरबद्ध कविता है जिसकी पंक्तियां हिब्री वर्णमाला के क्रमिक अक्षरों से आरंभ होती हैं 1 हमरभअपनें

़िएक िै!

उनोंइसएल भव

वरउठकर पर ेंिै;

उनोंअपनचरण

अपनअवसर पर मरण रखा.

2 रभसमसआवों िगल ि

उनोंनहीं ़ा ै;

अपनें उनोंयहि

गढनगरों भगकर िै.

उनोंतथइसकसकों अपमििै,

उनोंउन सभें ़ा ै.

3 उनोंउगें इसएल

समसबल िरसकर िै.

उनोंउनकऊपर अपनरकां ींिै,

जब शतउनकसमकखड़ा ा.

वह ें रचअगि बन जल उठ

िससउनकिकटवरसभभसगया.

4 एक शतसदउनोंअपनधनींा;

एक िसदउनकां ततपर गया.

़िििें

उन सभकर िा;

हमि ें मनभवन

उनोंअपनअगि-सदिा.

5 हमरभएक शतवररण कर िै;

उनोंइसएल िगल िै.

उनोंसमसजमहलों िि

और इसकसमसगढनगरों उनोंनषकर िै.

यहि

ें उनोंिएवबढ़ा िै.

6 अपनउनोंऐसउजिै, वह एक उदा;

उनोंअपनिलननषकर ै.

हव़ििउतसव

तथशब2:6 शब्बाथ सातवां दिन जो विश्राम का पवित्र दिन है िकरनिि ै;

उनोंअपनरचें सम

तथिपद बनिै.

7 हमरभअब अपनगई

और उनोंपविकर िै.

जमहल ें

अब शतअधगई ै;

हवभवन ें हल उठ रह

यह ििउतसव-अवसर ै.

8 यह हवकलि

़िें ़ी ं.

पक िकर िि

उनोंअपनों ा.

परिमसवरितथिकरतरही;

दना-िें एकजगईं.

9 उसकरवि ें गए;

उनोंउसकरकछड़ों कर नषकर िै.

उसकएवसक अब ों ें ैं,

ियम-वयवसअब रह गई ै,

अब उसकभवियवकहव

ओर रकशन ्‍नहीं ा.

10 ़िवज

ि पर ैं;

उनोंअपनिपर रख

तथउनोंपहन ै.

शलवतिों

िि ओर ैं.

11 े-अपनि ैं,

उदर ें थन रहै;

िि पर िखरपड़ा ै;

इसकएक रण ै; रजसरवन,

नगर गलिों ें

िपड़े िएवलक.

12 अपनी-अपनसमककर कह रहैं,

"कहां हमजन, कहां हमरस?"

नगर गलें

यल समपड़े ैं,

अपनी-अपनें

पड़े उनकवन रहै.

13 शली,

कहूं ैं मसे,

िससकरूं ैं लना?

़िुंकना,

ांवनलक

िससकरूं ैं ?

तथयह ि िमहगर सदपक ै.

अब ें कर सकतै?

14 भवियवकियर

तथरकशन ै;

उनोंिठतरकिनहीं िा,

ि समि ि.

िंिऐसरकशन रसकरतरहें,

यरएवमक े.

15 सब इस ओर िकलतैं

िि खकर उपहकरत;

शलपर

िितथििवनि िलतैं:

िकरतैं, "यहवह नगरी,

परम दरयवत

तथसमसउली?"

16 सभशतिअपमनपशबों रयकरत;

ििवनिों ांसतउचवर ें षणकरतैं,

"ो, ो! हमनउसिगल िै! आह, ितनरतहमनइस िी;

िचयतआज वह िगयआज वह हमि समकै."

17 हवअपनलकि कर ै;

उनोंअपनवघषणिपति कर ि;

वह षणा, उनोंी.

िि उनोंें ेंिउसमें ़ी करी,

उनोंशतमरऐसिकसिकर िा,

ि शतिि पर उल्‍लसिरहैं.

18 ़ि

उचवर ें अपनरभो.

िऔर ि

अपनअशरवउगजलधा-सद

रविकरतरहो;

वयहत ो,

और ों आर.

19 उठो, ि ें ो,

ि रहर ी;

जल-सदअपनदय

अपनरभउपसिि ें.

अपनकलि

अपनउनकओर बढ़ा,

उस ि,

हर एक गलपर िरहै.

20 "हव, खकर िि:

वह, िसकआपनइस रकयवहिै?

यह गत ि िां अपनगरफल आहबनं,

िनकउनोंवयलन षण िै?

यह उपयि िों एवभवियवक

हमरभपविें ि?

21 "सडि ें

एवों शव पड़े ैं;

वक, वतिों

तलविगयै.

अपनप-दिवस ें

आपनउनकिदयतवक कर ै.

22 "आपनआतों आहों ओर इस िा,

आप इनें िउतसव आमरण रहैं.

यह सब हविै,

इसमें बचकर रह सका;

सब े, िनकआपनअपनें रखकर लन षण िा,

शतउनकसरवनकर िै."

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