1 मैं वह व्यक्ति हूं,
जिसने याहवेह के कोप-दण्ड में पीड़ा का साक्षात अनुभव किया है.
2 उन्होंने हकालते हुए मुझे घोर अंधकार में डाल दिया है
कहीं थोड़ा भी प्रकाश दिखाई नहीं देता;
3 निश्चयतः बार-बार, सारे दिन
उनका कठोर हाथ मेरे विरुद्ध सक्रिय बना रहता है.
4 मेरा मांस तथा मेरी त्वचा गलते जा रहे हैं
और उन्होंने मेरी अस्थियों को तोड़ दिया है.
5 उन्होंने मुझे पकड़कर कष्ट
एवं कड़वाहट में लपेट डाला है.
6 उन्होंने मुझे इस प्रकार अंधकार में रहने के लिए छोड़ दिया है
मानो मैं दीर्घ काल से मृत हूं.
7 उन्होंने मेरे आस-पास दीवार खड़ी कर दी है, कि मैं बचकर पलायन न कर सकूं;
उन्होंने मुझे भारी बेड़ियों में बांध रखा है.
8 मैं सहायता की दोहाई अवश्य देता हूं,
किंतु वह मेरी पुकार को अवरुद्ध कर देते हैं.
9 उन्होंने मेरे मार्गों को पत्थर लगाकर बाधित कर दिया है;
उन्होंने मेरे मार्गों को विकृत बना दिया है.