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मार्कास 14:12,26,32,43,46

OHSS Hindi Contemporary Version

फ़सह भोज की तैयारी

12 अखमीरी रोटी के उत्सव के पहले दिन, जो फ़सह बलि अर्पण की बेला होती थी, शिष्यों ने मसीह येशु से पूछा, "हम आपके लिए फ़सह कहां तैयार करें—आपकी इच्छा क्या है?"

26 एक भक्ति गीत गाने के बाद वे ज़ैतून पर्वत पर चले गए.

गेतसेमनी उद्यान में मसीह येशु की अवर्णनीय वेदना

32 वे गेतसेमनी नामक स्थान पर आए. मसीह येशु ने अपने शिष्यों से कहा, "जब तक मैं प्रार्थना कर रहा हूं, तुम यहीं ठहरो."

मसीह येशु का बंदी बनाया जाना

43 जब मसीह येशु यह कह ही रहे थे, उसी क्षण यहूदाह, जो बारह शिष्यों में से एक था, आ पहुंचा. उसके साथ तलवार और लाठियां लिए हुए एक भीड़ भी थी. ये सब प्रधान पुरोहितों, शास्त्रियों तथा पुरनियों द्वारा भेजे गए थे.

46 इस पर उन्होंने मसीह येशु को पकड़कर बांध लिया.

Em outras traduções

  1. HSB Hindi Standard Bible

    12 अख़मीरी रोटी के पर्व के पहले दिन, जब फसह के मेमने का बलिदान किया जाता था, उसके शिष्यों ने उससे पूछा, "तू कहाँ चाहता है कि हम जाकर तेरे खाने के लिए फसह का भोज तैयार करें?"

    26 फिर वे भजन गाकर जैतून पहाड़ की ओर चले गए।

    32 फिर वे गतसमनी नामक स्थान पर आए, और उसने अपने शिष्यों से कहा,"जब तक मैं प्रार्थना करता हूँ, यहीं बैठे रहो!"

    43 अभी यीशु यह कह ही रहा था कि यहूदा जो बारहों में से एक था, आ पहुँचा; और उसके साथ मुख्य याजकों, शास्‍त्रियों और धर्मवृद्धों की ओर से आई एक भीड़ थी जिनके पास तलवारें और लाठियाँ थीं।

    46 तब उन्होंने यीशु पर हाथ डाला और उसे पकड़ लिया।

  2. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    12 अख़मीरी रोटी के पर्व के पहले दिन, जिसमें वे फसह का बलिदान करते थे, उसके चेलों ने उससे पूछा, "तू कहाँ चाहता है, कि हम जाकर तेरे लिये फसह खाने की तैयारी करें?" (निर्ग. 12:6, निर्ग. 12:15)

    26 फिर वे भजन गाकर बाहर जैतून के पहाड़ पर गए।

    32 फिर वे गतसमनी नामक एक जगह में आए; और उसने अपने चेलों से कहा, "यहाँ बैठे रहो, जब तक मैं प्रार्थना करूँ।"

    43 वह यह कह ही रहा था, कि यहूदा जो बारहों में से था, अपने साथ प्रधान याजकों और शास्त्रियों और प्राचीनों की ओर से एक बड़ी भीड़ तलवारें और लाठियाँ लिए हुए तुरन्त आ पहुँची। 46 तब उन्होंने उस पर हाथ डालकर उसे पकड़ लिया।

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