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मत्तियाह 17

तरण

1 इस घटनितर, और उनकहन अनों अलग एक परवत पर गए. 2 वहां उनीं मनतरण गया. उनकहरसमअतचमकउठतथउनकवसरकसमउजजवल उठे. 3 उससमय उनें तथएलिें करतिि.

4 यह तरउठे, "रभु! हमयहां आनिषय ै! यदि आप कहें ैं यहां डप बनं—एक आपकि, एक ितथएक एलिि."

5 तरअभयह कह रहि एक उजलदल उन पर गयऔर उसमें एक शबिा, "यह ै—ि, िसमें ैं तरह ूं; इसकआजलन करो."

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