23 जब येशु यहूदी सभागृह के अधिकारी के घर पर पहुंचे तो उन्होंने भीड़ का कोलाहल और बांसुरी वादक शोक-संगीत बजाते हुए भी सुना. 24 इसलिये उन्होंने आज्ञा दी, "यहां से चले जाओ क्योंकि बालिका की मृत्यु नहीं हुई है—वह सो रही है." इस पर वे येशु का ठट्ठा करने लगे, 25 किंतु जब भीड़ को बाहर निकाल दिया गया, येशु ने कक्ष में प्रवेश कर बालिका का हाथ पकड़ा और वह उठ बैठी.