33 इस प्रकार उन्होंने याहवेह के पर्वत से अपनी यात्रा प्रारंभ की और तीन दिन यात्रा करते रहे. याहवेह की वाचा का संदूक तीन दिनों तक उनके आगे-आगे रहा कि इस्राएल के डेरे के लिए सही विश्राम का स्थान तय किया जा सके. 34 जब उन्होंने छावनी के स्थान से यात्रा शुरू की थी, दिन के समय याहवेह का बादल उनके ऊपर-ऊपर बना रहता था.
35 इसके बाद, जब भी संदूक के साथ यात्रा आरंभ करते थे, मोशेह का यह वचन था:
"याहवेह सक्रिय हो जाइए!
आपके शत्रु बिखर जाएं;
जिन्हें आपसे घृणा है आपके सामने से भाग जाएं."
36 जब भी संदूक ठहर जाता, मोशेह कहते थे,
"याहवेह,
हज़ारों हज़ार इस्राएलियों के निकट लौट आइए."