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ज़करयाह 4

वट और

1 िवह वरगदिसनझसें ी, आयऔर ऐसजगा, िींजगै. 2 उसनझसरशिा, "ें िरहै?"

ैंउततर िा, "एक वट िरहिसकपर एक कटिसमें ैं, और ों पर ित-सिां ैं. 3 वट ैं, एक कटीं ओर तथसरउसकीं ओर."

4 वरगदझसें कर रहा, ैंउससा, "रभु, सब ैं?"

5 उसनउततर िा, "नहीं नति ैं?"

ैंउततर िा, "रभु, नहीं."

6 अतवरगदझसकहा, "यह ़ेिहववचन ै: बल और शकि े, पर आता,’ सरवशकिहवकहनै.

7 "िपह़, ? ़ेमनसमतल बन ओगे. तब वह पतथर यह िआएगा, परमवर इसआशे! परमवर इसआशे!’ "

8 इसकहवयह वचन आया: 9 "़ेअपनों इस िींै; और उसयह ा. तब ि सरवशकिहवै.

10 "ों िसमझतै, जबकि हवें पर नजर रखतैं, जब यह ेंि पतथर ़ेें ै, आनिोंी?"

11 तब ैंवरगदा, "़ों मतलब ै, वट ीं और ीं तरफ ैं?"

12 ैंउससिा, "नलिों ें ें ैं नहरलतैं?"

13 वरगदउततर िा, "नहीं नति ैं?"

ैंकहा, "रभु, नहीं."

14 तब उसनकहा, "ैं िें रभकरनिअभििगयै."

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