22 ज़िहअ एकी मणछा आदमीए पाप करनै पिछ़ू सोभी मणछा लै मौत आई। तिहै ई हणैं एकी मणछा मसीहा ईशू करै सोभै मूंऐं दै खिरी ज़िऊंदै। 23 पर हरेक हणअ आपणीं बारी दी ज़िऊंदअ। मसीहा त पैहलअ ज़ुंण ज़िऊंदअ हुअ, ज़ांऊं मसीहा ज़िऊंदअ हुअ तै ज़सरअ मसीहा संघै पाक्कअ नातअ होए तिंयां हणैं मरी करै भिई ज़िऊंदै ज़ेभै मसीहा भिई फिरी एछणअ।
24 संसारे सोभै गल्ला हणीं तेभै खतम ज़ेभै मसीहा एऊ सारै संसारो राज़ बाब परमेशरा सेटा सभाल़ी दैए। तेभै करनी राख्से सारी शगती अर हक बरैबाद।
25 किल्हैकि ज़ेभै तैणीं सह आपणैं दुशमण राख्सा हारी करै आपणैं खूरा हेठै निं पाऐ, तेभै तैणीं रहणअ तेऊ राख्सो राज़ एऊ संसारै ज़रूरी।