बैहा बाद ज़िन्दगीए बारै सुआल
1 ऐबै ज़ुंण सुआल तम्हैं मुखा पुछ़अ कि बैह किऐ दै विश्वासी केही ज़िन्दगी लागा ज़िऊंणीं। हुंह बोला इहअ कि कई बारी निं बैह करनअ ज़रूरी बी हंदअ। 2 पर बेटल़ी बी निं लोल़ी कंज़री हुई, अर नां लोल़ी मर्ध कंज़रअ हुअ, इहै पाप करनै का दूर रहणा लै लोल़ी सोभी मर्धे आपणीं-आपणीं बेटल़ी हुई, अर सोभी बेटल़ीए लोल़ी आपणैं-आपणैं मर्ध हुऐ।