14 म्हारै खलाफ ज़ुंण बधाना दी सज़ा ती लिखी दी तेऊ किअ सह खतम अर क्रूसा दी टोक्की करै किई हाम्हां का सदा लै दूर। 15 इहअ करै पाई तेऊ संसारे मणछा दी राज़ करनै आल़ी आत्मिक शगती हारी अर तिन्नों बणाअं सोभी नदरी तमास्सअ, अर क्रूसा करै लागअ सोभी का थोघ कि संसार हेरअ राख्सा का आज़ाद करी।