5 तिन्नां मणछा मांझ़ै रही ज़िऊआ आपणीं ज़िन्दगी समझ़कार रही ज़ुंण विश्वासी निं आथी अर हर मोक्कै समझ़ा किम्मती। 6 थारी गल्ला करनी लोल़ी सदा एही हुई ज़ेथ झींण होए अर शुणनै आल़ैओ बी तेथ मन्न लागे, ताकि ज़ुंण तम्हैं विश्वास करा, तेते बारै तम्हैं सोभी मणछा लै राम्बल़ै करै ज़बाब दैणअ एछे।
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