बैतसैदा नगरी एक कांणअ ठीक करनअ
22 तेखअ आऐ तिंयां बैतसैदा नगरी दी, लोगै आणअ एक कांणअ मणछ तेऊ सेटा लै अर तिन्नैं किई तेऊ का अरज़ कि एऊ छ़ुंह।
23 तेऊ निंयं सह कांणअ मणछ हाथा का ढाकी करै नगरी का बागा लै अर तेऊए आछी थूक लाई हाथ डाहै, अर तेऊ का पुछ़अ, "ऐबै लागअ ताखा शुझदअ ऐ?" 24 तेऊ मणछै बोलअ आछी घुआल़ी करै, "मुखा लागै लोग शुझदै पर राम्बल़अ निस्सअ शुझुई तिंयां शुझिआ मुखा ज़िहै मुंह फेर आसा डाल़ बूट लागै दै हांढदै।"
25 तेखअ लाऐ भिई ईशू तेऊए आछी हाथ अर तेऊ कांणै का लागअ राम्बल़अ शुझदअ! अर सह हुअ ज़ाथी ताज़अ-नरोगअ। 26 ईशू छ़ाडअ सह इहअ बोली घअरा लै, "ऐहा नगरी निं बापस डेऊई।"