दान
1 "ऐहा गल्लो डाहै धैन कि तम्हैं निं सिधै एते तैणीं भलअ करी कि लोगै लोल़ी तम्हैं भाल़ै। तै निं तम्हां तेतो स्वर्गे परमेशर थारै बाबा का किछ़ै फल भेटणअ।
2 "तैही बोला हुंह, ‘ज़ै तूह गरीबा लै दान करे, सह निं सोभी का लागदअ खोज़णअ कि मंऐं किज़ै दैनअ। ज़िहअ कपटी मणछ सभागृहा अर बागै काढा रहैऊंणा लै। ताकि लोग तेता भाल़ी तिन्नें बड़ैई करे।’
"हुंह खोज़ा तम्हां का सत्त कि तिन्नां गअ तेतो फल भेटी। 3 पर ज़ेभै तूह गरीबा लै दान करे, तेभै निं कोही का लोल़ी थोघ लागअ कि तंऐं किज़ै दैनअ। 4 ताकि तेरअ गरीबा लै दैनअ द दान गुप्त रहे अर थारअ बाब परमेशर ज़ुंण गुप्त गल्ला भाल़ा, तेऊ दैणअ ताल्है तेतो फल।
प्राथणां
(लूका 11:2-4)
6 पर ज़ेभै तूह प्राथणां परमेशरा सेटा गल्ला करे, तेभै डेओऐ आपणीं पांडा भितरी, संघा करै दुआर बुदरी करै गुप्त प्राथणां। तेरअ बाब परमेशर ज़ुंण ताह गुप्त भाल़ा, तेऊ दैणअ ताल्है तेतो फल।