14 मेरी महान धैल़ीओ बगत आसा पुजणैं आल़अ,
सह धैल़ी जाणीं तेतरी छ़ेक्कै पुजी।
तैहा धैल़ी पुजणें शणांईं शुण्हुंई लागणै बडै-बडै शूरबीर लेरा लांदै।
15 सह हणीं मेरी रोश्शे धैल़ी, ज़ेभै घोर खरी अर आफ़त पल़णीं।
सह धैल़ी हणीं उज़र अर बनाशे धैल़ी।
तैहा धैल़ी हणअ नटिप्प न्हैरअ फेरा-फेर हणैं घणैं काल़ै बादल़ घोर्हुऐ दै।
16 लोगा का शुण्हनै तैहा धैल़ी जुधा लै नर्शिंगै बाज़दै
अर दुशमण सैने हाक्का-भ्रुका।
सह छ़ेल़ शुण्हनी एही कि दुशमण आसा नगरीए गहल़-कोटा ढोल़दै लागै दै।
17 मुंह दैणीं मणछा लै एही आफ़त पल़णै,
तिंयां हणैं इहै मणछा ज़िहै तोफदै लागै दै ज़हा आछी का किछ़ै निं शुझदअ।
किल्हैकि तिन्नैं किअ मुंह बिधाता लै पाप,
तिन्नों लोहू पोछणअ धरनीं पाणीं ज़िहअ,
तिन्नें ल्हासा रहणीं धरनीं कज़ेस्सी पल़ी।
18 मेरी बिधाते रोश्शे धैल़ी निं तिन्नों सुन्नअ-च़ंदी तिन्नां बच़ाऊई सकदअ।
मेरै रोश्शे आगी करै हणीं सारी पृथूई खतम।
एथ बस्सै दै हणैं सोभ हेरा-हेरी खतम।"