मसी नो मोंग
14 मे आहयात कारण सी तीहया बाह अगळ मांडा टेकु, 15 जीनी सी ह़रग अने धरती पोर ना जागा मे, एक-एक3:15 नीता आखा घोराणा ना नाम पाड़े, 16 मे वीन्ती करु के तीहयो आह़फा ना बड़ाय ना धन ना अनसारे तमने आहयु दान आपे के तमु तीनी आत्मा सी आपणा मोय वाळा माणेह मे ताखत हात करीन जोरभर्या हयता जावो; 17 अने भरहा नी लारे मसी तमारा मन मे वहे। अने मे वीन्ती करु के तमु मोंग मे जेड़ धरीन अने नीव नाखीन, 18 आखा चोखला माणहु ह़ाते आखी भाते ह़मजवा नी सक्ती हात करो के तीनी चवड़ाय, अने लम्बाय, अने उचाय, अने उन्डाय केतरी से। 19 के तमु मसी ना तीहया मोंग ने जाण सको जे अमारी ह़मज सी बाहर से, अने एतरे तमने पुरी रीती सी भगवान ना सोभाव सी भराय्न रेवु जोवे।