21 एक बार जबा तुमी परमेस्वर लक लगत दूहुर होतो। अना तुम मन लक बैरी होतो, जोन आपरो कियो गयो खोटो काम अना बिचार को कारन लक होतो। 22 पर अब, आपरो टूरा की देह को मरनो लक, परमेस्वर ना तुमला, पवीतर, सूद्ध अखीन बेकसूर होवन लाय अपरो पुढ़ा आनन काजी, तुमला मेल मिलाप कर आपरो संगी बना लियो सेत। 23 अदी तुम भरोसा को नीव मा पक्को रूप लक बनो रव्हो अना वा साजरा बारता को आस ला जोन तुमी आयकु सेव, नही छोड़यो, जोनको परचार बादल को खाल्या, सारो दुनिया मा कव्हयो गयो अना वोको दास मी पौलुस बनीसेव।
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