32 आपसी मा एक दुसरो को दया अना रहमसील बनने, अना परमेस्वर ना मसीह मा जसो तुमरो गलती ला छिमा कियो गईसे। वसोच तुमी भी एक दुसरो की गलती ला छमा करने।
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32 आपसी मा एक दुसरो को दया अना रहमसील बनने, अना परमेस्वर ना मसीह मा जसो तुमरो गलती ला छिमा कियो गईसे। वसोच तुमी भी एक दुसरो की गलती ला छमा करने।